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कैसे करें भाग्य को जागृत

ईश्वर सर्वशक्तिमान है। ग्रह-नक्षत्र और देवी-देवता सभी उसके अधीन है। ईश्वर के बाद ईश्वर की प्रकृति महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार प्रकृति ने रोग, शोक या अन्य घटना, दुर्घटना को प्रदान किया उसी प्रकार उसने उक्त सभी से बचने के उपाय भी दिए हैं।

प्रकृति में ही है वह उपाय जिससे आप अपनी सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को जागृत कर सकते हैं।

घर को बनाएं भाग्यवर्धक : –
1. घर हो वास्तु अनुसार।
2. घर का द्वार उत्तर, पश्चिम या पूर्व दिशा में हो।
3. घर सदा साफ-सुधरा रखें।
4. घर के भीतर अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखें।
5. घर में ढेर सारे देवी और देवताओं के चित्र या मूर्तियां न रखें।
6. घर का ईशान कोण हमेशा खाली रखें या उसे जल का स्थान बनाएं।
7. दरवाजे के ऊपर भगवान गणेश का चित्र और दाएं-बाएं स्वस्तिक के साथ लाभ-शुभ लिखा हो।
8. घर में मधुर सुगंध और संगीत से वातावरण को अच्छा बनाएं। रात्रि में सोने से पहले घी में तर किया हुआ कपूर जला दें।

शरीर को बनाएं भाग्यवर्धक :-

1. जिस तरह वास्तु अनुरूप घर ही उत्तम फलदायी होता है, उसी तरह योग या व्यायाम से शरीर का वास्तु भी सुधारें।
2. फास्ट फूड, जंक फूड, स्पाइसी फूड, ग्रेवी फूड, ऑइली फूड आदि सभी को छोड़कर शुद्ध सात्विक और संपूर्ण आहार का चयन करें। भोजन के बाद मीठा खाना या फल लेना अति उत्तम।
3. शरीर को हमेशा सुगंधित और साफ-सुधरा बनाए रखें।
4. व्यवहार भी शरीर की प्रकृति है उसे उत्तम बनाएं। अनुचित व्यवहार से दूर रहें।
5. प्रतिदिन ईश्वर की प्रार्थना करें। प्रार्थना से शरीर और मन स्वस्थ तथा शांतिमय बना रहता है।
6. सभी तरह के व्यसन से दूर रहें।
7. सत्यवादी रहकर एकनिष्ठ बनें। इससे लक्ष्य और निर्णय का विकास होता है, साथ ही दिमाग शक्तिशाली बनता है।

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