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भारत-पाक दोनों का राष्ट्रध्वज फहराया था जिन्ना की पुत्री ने

देश की आजादी का अवसर सभी के लिए खुशी का मौका था। सरहद के उस पार 14 अगस्त को चांद सितारे वाला हरा ध्वज फहराया गया, जबकि इस तरफ तिरंगा शान से सिर उठाए लहरा रहा था, लेकिन कम ही लोगों को मालूम होगा कि इस दिन मुम्बई के पॉश इलाके में स्थित एक मकान पर भारत और पाकिस्तान दोनों का ध्वज फहरा रहा था।
यह मकान पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की पु़त्री दीना का था, उनके पिता ने देश को बंटवारे का दंश दिया था और उन्हीं के प्रयासों से पाकिस्तान वजूद में आया इसलिए उन्होंने अपने घर पर पाकिस्तान का झंडा फहराया, लेकिन चूंकि भारत को आजादी मिली थी और वह भारत में थीं इसलिए उन्होंने भारतीय ध्वज फहराना भी जरूरी समझा। यह उनके भीतर आजादी को लेकर उठती दुख और खुशी की मिलीजुली भावनाओं का प्रतीक था।
भारत की आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वायसराय लार्ड माउंटबेटन को अपने मंत्रिमंडल के 13 सदस्यों के नाम बंद लिफाफे में एक पत्र में दिए। माउंटबेटन ने जब लिफाफा खोला तो उसके अंदर भीतर एक कोरा कागज था, दरअसल, जल्दबाजी में लिफाफे की अदला-बदली हो गई थी और सदस्यों के नाम वाले कागज की बजाय सादे कागज वाला लिफाफा वायसराय के हाथ में पहुंच गया।
भारत की आजादी की घड़ी आ चुकी थी। देश के पहले वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के मन में एक कसक बाकी थी। दरअसल, वह अपने मित्र पालनपुर के नवाब की पत्नी को ‘हाइनेस’ का खिताब देना चाहते थे।
लार्ड माउंटबेटन ने अपने अंतिम आदेश के रूप में अपनी इस इच्छा को पूरा किया और 14 अगस्त 1947 की रात को जब वह इस आदेश पर हस्ताक्षर कर रहे थे तब घड़ी में रात के 11 बजकर 58 मिनट का समय हुआ था।
माउंटवेटन ने भारत की स्वतंत्रता की तारीख 15 अगस्त तय की थी लेकिन यहां ज्योतिषियों ने कहा कि यह दिन भारत के लिए शुभ नहीं है इसलिए स्वतंत्रता दिवस के समारोह की शुरुआत 14 अगस्त की मध्यरात्रि को हो गई थी। जिन्ना के लिए भी यह शुभ नहीं प्रतीत हो रहा था, क्योंकि जिस बग्घी पर उन्हें जाना था, उसके घोड़े के पांव में चोट लग गई।
इसके साथ ही जिन्ना ने 13 अगस्त को अपने आवास पर दोपहर का भोज दिया था लेकिन बाद में पता चला कि यह रमजान का महीना है, जिसमें मुसलमान सूर्यास्त के बाद इफ्तार के समय ही कुछ ग्रहण करते हैं।

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