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मेरठ महापंचायत में बवाल, तीन की मौत

भाजपा विधायक संगीत सोम पर रासुका लगाए जाने के विरोध में सरधना तहसील क्षेत्र के गांव खेड़ा में रविवार को प्रतिबंध के बाद हुई महापंचायत में जमकर बवाल हुआ। पथराव, पुलिस फायरिंग व लाठीचार्ज में तीन लोगों के मारे जाने की सूचना है। 40 से ज्यादा घायल हैं। एक की मौत पुलिस की गोली लगने से बताई जा रही है। गुस्साई भीड़ ने कमिश्नर, डीआइजी, डीएम और एसएसपी समेत विभिन्न अधिकारियों और रोडवेज की 50 से अधिक गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ कर तीन को आग के हवाले कर दिया।

 

घंटों बवाल जारी रहा और आला अफसर स्थिति संभालने के बजाए अपनी जान बचाने को कालेज के कमरे में दुबके रहे। हालात बेकाबू होते देख डीएम ने सेना बुलाने की मांग की है। मेरठ सब एरिया से आठ कालम सेना भेजने की तैयारी की जा रही है।

 

खेड़ा में पूर्व घोषित महापंचायत के आयोजन को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने पूरी तैयार कर रखी थी, लेकिन ठाकुर चौबीसी के हजारों लोग गांव में आकर खेतों में छिप गए थे। इस महापंचायत को लेकर पहले से ही पुलिस व ग्रामीणों में टकराव के कयास लगाए जा रहे थे। महापंचायत में संगीत सोम पर रासुका लगाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री आजम खां पर प्रहार किए गए और उन पर हिंदुओं के उत्पीडऩ का आरोप लगाया गया। महिलाओं की संख्या भी हजारों में रही।

महापंचायत के बाद इसके प्रतिनिधियों ने खेड़ा स्थित जनता इंटर कालेज के प्रांगण में जाकर अफसरों को अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन देने की कोशिश की, मगर एसएसपी दीपक कुमार ने ज्ञापन लेने से मना कर दिया। इस बात को लेकर प्रतिनिधियों व पुलिस अफसरों के बीच नोकझोंक भी हुई। इस पर पुलिस ने प्रतिनिधियों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। बाहर जब इसकी जानकारी हुई तो हजारों की भीड़ ने कालेज परिसर में बैठे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला बोल दिया।

उन्होंने परिसर में खड़े अफसरों के वाहनों में तोडफ़ोड़ की और तीन वाहनों में आग लगा दी। इसी बीच पुलिस ने केंद्रीय अ‌र्द्धसैनिक बल की मदद से हवाई फायरिंग शुरू कर दी। एकाएक वहां भगदड़ मच गई। इसमें तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। जबकि 40 लोग घायल हो गए। इन्हें अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है रार्धना निवासी मोहित की पुलिस की गोली लगने से मौत हुई है। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अभी किसी के मरने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

हालात इतने गंभीर हो गए कि खेड़ा के चारों ओर पुलिस व प्रशासनिक अफसर गांव से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। पुलिस से मोर्चा लेने के लिए ग्रामीण खेतों में छिपे हैं। डीएम नवदीप रिणवा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सेना की भी मदद मांगी है। मेरठ छावनी ने आठ कॉलम सेना सरधना भेजने को तैयार कर दी है। प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव, डीजीपी देवराज नागर व एडीजी कानून व्यवस्था मुकुल गोयल ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित गांवों में कड़ी सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं। पूरे क्षेत्र में अघोषित क‌र्फ्यू जैसे हालात हैं। इस घटना के बाद सरधना का मुख्य बाजार बंद हो गया है। तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

लोगों का कहना था अगर आला अफसरों ने सूझबूझ से काम लिया होता तो यह हालात पैदा नहीं होते। पूर्व में मुजफ्फरनगर जिले में हुई हिंसा से भी अधिकारियों ने सबक नहीं लिया और उनकी लापरवाही से यहां भी हालात बिगड़ गए।

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