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भारतीय टीम ने नागपुर में रचा इतिहास

सात मैचों की वनडे सीरीज में 1-2 से पिछड़ने वाली भारतीय टीम ने नागपुर में एक बार फिर उसी तरह से  जैसा कि जयपुर वनडे में किया था। जयपुर में जहां भारत ने 360 का टारगेट हासिल किया था, वहीं इस बार कंगारुओं द्वारा दिए गए 351 के लक्ष्य को भारतीय बल्लेबाजों ने 49.3 ओवर में महज 4 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया। यह वनडे इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए तीसरी सबसे बड़ी जीत है, जबकि भारतीय वनडे इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरी सबसे बड़ी जीत।

 

मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरे कंगारुओं की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। सातवें ओवर में फिलिप ह्यूंग्स (13) के रूप में उन्होंने अपना पहला विकेट गंवाया, ह्यूंग्स भुवनेश्वर की गेंद पर कोहली के एक शानदार कैच का शिकार हुए जबकि लय में दिख रहे एरोन फिंच (20) भी ज्यादा देर तक नहीं टिक सके। रविचंद्रन अश्विन ने मैच में अपनी पहली ही गेंद पर फिंच को बोल्ड कर पवेलियन भेज दिया लेकिन इसके बाद शुरू हुआ इन फॉर्म कप्तान बैली और धुआंधार खिलाड़ी शेन वॉटसन का जलवा। वॉटसन ने जहां 93 गेंदों में अपना धुआंधार शतक पूरा किया, वहीं बैली भी अर्धशतक पूरा कर एक बार फिर सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाते रहे। वॉटसन (102) अपने शतक के तुरंत बाद शमी की गेंद पर बोल्ड हुए जबकि ठीक उसके बाद मैक्सवेल (9) भी सस्ते में अश्विन की गेंद का शिकार बने और बाउंड्री पर कैच हो गए, हालांकि इन फॉर्म कप्तान जॉर्ज बैली ने जो इसके बाद किया उसने भारतीय गेंदबाजों की जड़ों को हिलाकर रख दिया। अब तक सीरीज के खेले गए चार मैचों में बैली ने चार अर्धशतक जड़े थे जिसमें दो बार वो शतक के करीब आकर भी चूके, लेकिन इस बार उन्होंने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए वनडे क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ ही दिया। शतक के बाद बैली और घातक हो गए और उन्होंने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए आउट होने से पहले 114 गेंदों में 156 रन ठोंक डाले। आखिर में एडम वोग्स ने भी 44 रनों की नाबाद पारी खेली और स्कोर 350 के आंकड़े को छू गया। अब भारत को एक बार फिर 350 का आंकड़ा छूने की मशक्कत करनी थी।

 

भारत के सामने अब 351 रनों का विशाल लक्ष्य था। धवन-रोहित की सलामी जोड़ी ने पिच पर टिकते हुए एक बार फिर जानदार साझेदारी को अंजाम दिया। दोनों ने जयपुर वनडे की ही तरह इस बार भी बढि़या खेल दिखाया और 178 रनों की साझेदारी की। रोहित 79 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद विराट कोहली पिच पर आए धवन का साथ देने और आते ही उन्होंने धुआंधार अंदाज में बल्लेबाजी की, धवन ने इसी बीच अपना दूसरा वनडे शतक भी पूरा किया, हालांकि वह शतक जमाते ही आउट हो गए। इसके बाद कोहली ने मोर्चा संभाला और धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए अपना शतक पूरा किया, यह उनके वनडे करियर का 17वां वनडे शतक रहा। इस बीच सुरेश रैना (16) और युवराज सिंह एक बार फिर शून्य पर सस्ते में आउट हो गए, लेकिन कोहली का कहर जारी रहा और अंतिम ओवर तक वो मैच को खींच ले गए। आखिरी ओवर में 6 गेंदों पर छह रन चाहिए थे और धौनी ने दूसरी गेंद पर चौका जड़ा व तीसरी गेंद पर दो रन लेकर तीन गेंद पहले जीत अपनी मुट्ठी में कर ली।

 

आज के मैच में भारत ने 350 से ऊपर का स्कोर का पीछा करके अपने वनडे इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर चेज किया। इससे पहले इसी सीरीज में जयपुर वनडे में भारत ने कंगारुओं के 359 रनों के पहाड़ को हासिल करके इतिहास रचा था और इस बार फिर उन्होंने 351 रनों का लक्ष्य हासिल किया जो इस फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर जुड़ गया है।

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