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सचिन की तारीफ में लारा ने कसीदे पढ़े

महान बल्लेबाज सचिन तेंडुलकर के सम्मान में मंगलवार को मुंबई के होटल ट्राइडेंट में इंडिया टुडे समूह के कार्यक्रम ‘सलाम सचिन’ के तहत 10 टेस्ट कप्तानों में जब वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा का नंबर आया तो उन्हों भी सचिन की तारीफ में कसीदे पढ़े। 

उन्होंने कहा कि जो लोग मेरी और सचिन की तुलना करना बेमानी हैं। हम दोनों की अलग-अलग स्टाइल है। भगवान ने मुझे बेटी दी और यदि मेरा बेटा होता तो मैं उसे बड़ा होने पर सचिन की बल्लेबाजी करते हुए वीडियो जरूर दिखाता। 

मुझे सचिन की बल्लेबाजी विस्मय कर देती है। मैं त्रिनिदाद टोबैगो में रहता हूं लेकिन वहां भी क्रिकेट के प्रति उतनी दीवानगी नहीं है, जितनी कि भारत में। मुझे लगता है कि यदि मेरा बेटा होता तो वो यूट्‍यूब पर मेरी बल्लेबाजी के विडियो देखता होता, तब मैं उससे कहता कि यदि बल्लेबाजी देखनी ही है तो सचिन की बल्लेबाजी स्टाइल देखो कि वे कैसे खेलते हैं। मेरे हिसाब से सचिन अपने आप में सपूर्ण क्रिकेटर हैं और हर क्रिकेटर को उन्हें फॉलो करना चाहिए।

सचिन से मेरी दोस्ती किशोरावस्था में हुई, जब हमारी उम्र केवल 17 18 बरस की थी। इस उम्र में अकसर दोस्ती जल्दी हो जाया करती है। हमारे साथ भी ऐसे ही हुआ। हम आज भी वह दोस्ती निभा रहे हैं। लारा के अनुसार जो भी क्रिकेटर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहा होता है, उस पर बहुत ज्यादा प्रेशर रहता है। एक अच्छा क्रिकेटर इस दबाव को झेलने का आदी हो जाता है। मसलन वह कभी निराश नहीं होता और न ही मीडिया की आलोचना की तरफ ध्यान देता है। 

सचिन 14 नवम्बर से वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां और अंतिम टेस्ट खेलने जा रहे है, जबकि मुझे बल्ला टांगे 6 साल का वक्त गुजर गया है। मुझे सचिन की फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण भावना से ताज्जुब होता है। उन्होंने भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को कभी निराश नहीं किया। न तो वह कभी थके और न कभी रुके। मैं जब उन्हें अंतिम टेस्ट खेलते हुए देखूंगा तो रोमांचित हुए बगैर नहीं रहूंगा। मुझे मालूम है कि भारत में क्रिकेट को लेकर और सचिन को लेकर कितनी दीवानगी है। 

इस मौके पर लारा ने बारबडोस मैच की यादें ताजा की, जब भारत को जीत के लिए चौथी पारी में 120 रन बनाने थे। सचिन जब तक मैदान पर थे, हमें चिंता सता रही थी कि आगे क्या होगा लेकिन इयान बिशप की आउट स्विंग गेंद उनके बल्ले को स्पर्श करती हुई आई और स्लिप में मैंने उनका कैच लपक लिया। मैं उस कैच को आज तक नहीं भूला हूं।

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