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सीबीआई की साख-सुधार पर सन्देह

डा. दिलीप अग्निहोत्री केन्द्र सरकार ने दावा किया है कि सीबीआई को स्वायत्त बनाना चाहती है। मंत्रियों के समूह की सिफारिशों को रिकार्ड मंे लाने के लिये हलफनामा दायर किया गया। सर्वोच्च मंत्रियों के समूह का गठन किया था। जिसे सर्वोच्च न्यायालय मंे हलफनामा दाखिल करना था। सरकार ने न्यायिक औपचारिकता का पालन किया।... 

राजनाथ की टीम में संवाद और संभवना

दिलीप अग्निहोत्री भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नें अपनी टीम में जोर का बदलाव धीरे से किया था। इसका असर दिखाई देंने लगा है। संसदीय बोर्ड में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को शामिल किया गया था। बोेर्ड में एक दर्जन सदस्य है। यहां पहुंचना प्रधानमंत्री पद की दावेदारी नहीं है। शिवराज सिंह चैहान की जगह नरेन्द्र... 

रामसेतु पर सरकार दुस्साहस

डा. दिलीप अग्निहोत्री नीयम ठीक न हो तो तमात तर्क बेमानी हो जाते है सेतु समुद्रम परियोजना पर सरकार की स्थिति ऐसी है। वह राम सेतु के विध्वंश में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसलिए उसने परियोजना से संबधित धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आपत्तियों को खारिज कर दिया गया है। जनहित और जनभावना का सम्मान करने वाली किसी... 

किसका मनोबल बढ़ा रहे हैं कथित मानवाधिकारवादी

{डा. दिलीप अग्निहोत्री} आतंकवाद पर कठोर रूख वाले देश में किसी आतंकी को दी गई वाली सजा पर सवाल नहीं उठाये जाते। यह बात सत्ता और समाज दोनों के स्तर पर होती है। इस प्रकार आतंकी संगठनों को संदेश मिलता है। उनका मनोबल कमजोर होता है। अमेरिका का उदाहरण सामने है। नाइन इलेवन के बाद उसने अपने गुनहगारों के व्ययपक स्तर पर... 

सामाजिक समरसता का पर्व मकर संक्रान्ति –

  बृजनन्दन यादव मकर संक्रान्ति समाजिक समरसता का पर्व है। यह व्यक्ति के बीच भेद को मिटाकर  आपसी प्रेम एवं सौहार्द को बढ़ावा देता है। इस दिन सूर्य भूमध्य रेखा को पार करके उत्तर की ओर अर्थात मकर रेखा की ओर बढ़ना शुरू करता है। इसी को सूर्य का उत्तरायण स्वरूप कहते हैं। इससे पूर्व वह दक्षिणायन होता है। जब सूर्य... 

विश्व भाषा की हकदार है हिन्दी- सुरेश चन्द्र शुक्ला

प्रवासी भारतीयों ने विश्व के अनेक देशों में उल्लेखनीय कार्य किये हैं। विदेशों में अपनी संस्कृति के साथ-साथ भाषा के संवाहक बने हैं। विदेंशों में संस्कृति, संस्कृत और हिन्दी की प्रतिष्ठा का बड़ा कारण यही है। प्रवासी भारतीयों के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता।  उन्हीं में से एक हैं।  लखनऊ में 10 फरवरी 1954 में... 

उच्च शिक्षा के स्वरूप में सुधार आवश्यक

डा0 दिलीप अग्निहोत्री आधुनिक शासन प्राणाली का स्वरूप लोककल्याणकारी है। इसमें शासन का वास्तविक लक्ष्य लोककल्याण होता है। इसी के अधार पर उसका आकलन होता है। उसकी सफलता या असफलता का आकलन होता है। इसके मद्देनजर चिकित्सा और शिक्षा का विशेष महत्व है। इसमें शासन पूंजी लगाता है। लेकिन इसमें प्रत्यक्ष लाभ की उम्मीद... 

कानून के साथ नीयत व नैतिकता आवश्यक

डा0 दिलीप अग्निहोत्री देश में महिलाओं पर होंने वाले जघन्य जुल्म आम बात है। केन्द्रीय गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में 2009 से 2011 के बीच बलात्कार के 67 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए। इनमें चैहत्तर प्रतिशत मामलों की जांच किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। देश की राजधानी दिल्ली में ऐसे अपराधों के मामलें में शीर्ष... 

न्यायिक निर्णय की अधूरी व्यख्या बसपा के प्रमोशन पर हो सकता है प्रतिकूल प्रभाव

       {डाॅ0 दिलीप अग्निहोत्री} न्याय की कसौटी पर खारिज हुआ मसला अब राजनीतिक दांव-पेंच के हवाले है। प्रमोशन में रिजर्वेशन के वर्तमान स्वरूप को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अमान्य बताया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पर सहमति व्यक्त की थी। यहां ध्यान रखना चाहिए कि न्यायपालिका ने प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था... 

रिहाई…… (लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति)

डॉ. मंजरी शुक्ल   बहुत बचपना था उसमें  मानो ओस की बूंद शरमाकर मिटटी की सोंधी खुशबू   लेने के लिए गीली धरती पर चुपके से मोती बन गिरी  और आसमान में  उमड़ते हुए बादल उसे देखकर पकड़ने के लिए घुमड़ता  हुआ चला आये I पर  इन सब बातों से बेखबर वो अपनी इक छोटी सी दुनिया में मस्त रहती जहाँ पर एक दियासलाई और उसकी एकमात्र... 
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