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रिहाई…… (लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति)

डॉ. मंजरी शुक्ल   बहुत बचपना था उसमें  मानो ओस की बूंद शरमाकर मिटटी की सोंधी खुशबू   लेने के लिए गीली धरती पर चुपके से मोती बन गिरी  और आसमान में  उमड़ते हुए बादल उसे देखकर पकड़ने के लिए घुमड़ता  हुआ चला आये I पर  इन सब बातों से बेखबर वो अपनी इक छोटी सी दुनिया में मस्त रहती जहाँ पर एक दियासलाई और उसकी एकमात्र... 

बाधा…(लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति)

शम्भु यादव राष्ट्रीय राजमार्ग की विस्तृत सड़क पर तरह-तरह की गाडि़याँ तेज रफ्तार भागती भीषण-शोर ………… इस सड़क के बीचों-बीच उकडू हुआ बैठा है एक रिक्शे वाला अपने साइकल रिक्शा के टायर पर उभर आए टेढे़पन को ठीक करने में लगा जोर से मुक्के मार रहा है चक्के पर तेज रफ्तार गाड़ीवानों से गालियाँ सुनता उसका मन विचलित... 

रहमत…(लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति)

                  (शर्मिष्ठा पाण्डेय)   *खाली है जेब,खाली पेट है तो क्या हुआ.. महबूब को दें चाँद, इनायत तो देखिये..   सोया हुआ एक शेर है,हिन्दोस्तां अपना.. चूहा भी है ललकारता हिम्मत तो देखिये..   उफ़! दुश्मने दोशीजा की नज़रों से हैं घायल.. हैं नौजवां ये कैसे बेगैरत तो देखिये..   बीमार बाप खाट पे कराहता मरे.. देंगे वतन पे जान,देशभक्त देखिये..   भाषण की गूँज से हिलाते हैं कुतुबमीनार.. सरकारी नल भी जिनके अस्त-व्यस्त देखिये..   जो खींचते रहे हैं शपा सरे-शाम दुपट्टा.. सर्दी में बांटे कम्बल ये नौबत तो देखिये..   भूखा मरे किसान फिर भी सड़ रहा अनाज.. चंगेजी दलालों की ये रहमत तो देखिये..   नयी रोज़,योजनाओं में संवर रहा भारत.. इन कागज़ी फूलों की मसर्रत तो ... 

हिंदी कि तरह…(लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति)

            आशीष कुमार कंधवे एक तमाशा बन कर रह गया हूँ या कोई तमाशा कर रहा हूँ मैं उसके इशारे पर वैसे तो मैं  स्वतंत्र हूँ और देश भी स्वतंत्र है पर मैं कुछ नहीं कर सकता क्योंकि मैं एक डरपोक……….. इमानदार…….. व्यक्तित्व का धनी हूँ आज जहाँ  भी हूँ डरा हुआ हूँ सहमा हुआ हूँ अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है अपनी... 

नया बदलाव- लखनऊ सत्ता की विशेष प्रस्तुति .

                शर्मिष्ठा पाण्डेय नया बदलाव… ************************ *इस दफा घर को नज़र से यूँ बचाया जाएगा.. दीवारे-रोशन पे थोड़ा कालिख लगाया जाएगा..   सहन खुला है हवा जोरों की आती है शपा.. थोड़ी घुटन के लिए दीवार उठाया जाएगा..   खर्च बहुत बढ़ गए हैं आज बच्चों के.. इस दफा माँ को ही घर से निकाला जाएगा..   बढ़ती ही जाती है बेइंतिहा... 
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