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विश्व भाषा की हकदार है हिन्दी- सुरेश चन्द्र शुक्ला

प्रवासी भारतीयों ने विश्व के अनेक देशों में उल्लेखनीय कार्य किये हैं। विदेशों में अपनी संस्कृति के साथ-साथ भाषा के संवाहक बने हैं। विदेंशों में संस्कृति, संस्कृत और हिन्दी की प्रतिष्ठा का बड़ा कारण यही है। प्रवासी भारतीयों के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता।  उन्हीं में से एक हैं।  लखनऊ में 10 फरवरी 1954 में... 
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